मदिरा अर्पण परंपरा
मंदिर भगवान काल भैरव को पुजारियों के माध्यम से मदिरा अर्पित करने की विशेष परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

दर्शन समय, मंदिर का इतिहास, विशेष प्रसाद परंपरा, महाकालेश्वर मंदिर से मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी जानकारी।

काल भैरव मंदिर उज्जैन के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। भगवान काल भैरव को नगर के रक्षक देवता और भगवान शिव के उग्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। मंदिर अपनी दुर्लभ प्रसाद परंपरा के कारण भी देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
काल भैरव मंदिर उज्जैन के प्राचीन और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप और पवित्र नगरी का दिव्य रक्षक माना जाता है।
उज्जैन में काल भैरव को नगर का कोतवाल भी कहा जाता है। श्रद्धालु सुरक्षा, साहस, शांति और आशीर्वाद के लिए यहां आते हैं। मंगलवार, शनिवार और भैरव अष्टमी पर अधिक भीड़ रहती है।
| गतिविधि | समय | विवरण |
|---|---|---|
| मंदिर खुलने का समय | लगभग सुबह 5:00 बजे | प्रातः दर्शन प्रारंभ |
| प्रातः दर्शन | सुबह 5:30 – दोपहर 12:00 | शांत दर्शन के लिए उपयुक्त समय |
| दोपहर विश्राम | दोपहर 12:00 – 3:00 | विशेष दिनों में समय बदल सकता है |
| सायंकालीन दर्शन | दोपहर 3:00 – रात 9:00 | श्रद्धालुओं का लोकप्रिय समय |
| विशेष दिन | समय बदल सकता है | मंगलवार, शनिवार और भैरव अष्टमी पर अधिक भीड़ हो सकती है |
* त्योहार, विशेष पूजा और अधिक भीड़ वाले दिनों में समय बदल सकता है। यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें।
मंदिर भगवान काल भैरव को पुजारियों के माध्यम से मदिरा अर्पित करने की विशेष परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
श्रद्धालु फूल, नारियल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री अर्पित करते हैं।
कई श्रद्धालु सुरक्षा, शक्ति और शांति के लिए भैरव चालीसा और मंत्रों का पाठ करते हैं।
भैरव अष्टमी और विशेष दिनों पर अधिक भीड़ तथा विस्तृत पूजा-अनुष्ठान होते हैं।
मंदिर महाकालेश्वर से लगभग 2–3 किमी दूर है। ऑटो और स्थानीय परिवहन सामान्यतः उपलब्ध रहते हैं।
श्रद्धालु यात्रा में आसपास के घाट और मंदिर भी शामिल कर सकते हैं।
कार और टैक्सी मंदिर क्षेत्र के पास तक पहुंच सकती हैं। भीड़ वाले दिनों में पार्किंग बदल सकती है।
पता: काल भैरव रोड, उज्जैन, मध्य प्रदेश। यह मंदिर सामान्यतः उज्जैन दर्शन मार्ग में शामिल किया जाता है।
शांत दर्शन के लिए सुबह जल्दी या शाम की भीड़ से पहले पहुंचें।
मंगलवार, शनिवार और भैरव अष्टमी पर अधिक भीड़ की संभावना रखें।
प्रसाद और अर्पण के लिए पुजारी तथा मंदिर कर्मचारियों के निर्देश मानें।
एजेंट या अनधिकृत भुगतान लिंक पर भरोसा न करें।
भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों को अपने पास रखें।
घर से निकलने से पहले स्थानीय ट्रैफिक और पार्किंग अपडेट जांचें।